शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2010

प्रेम पुष्प





















तेरे ही सपने देखें हैं
तुझको ही अपना माना है,
याद में तेरी अब मुझको
क्यों लगता सब बेगाना है

तन्हा सी तपती आँखों में
जब याद तुम्हारी आती हैं,
ख्वाबों के मंदिर में जाकर
वो प्रेम पुष्प बरसाती है.

सामने जब तू आती है
दिल में हलचल सी होती है,
जीना मुश्किल हो जाता है.
कोई अनबन सी होती है.

मैंने भी तेरी पलकों को
प्यार में झुकते देखा है,
झील सी तेरी आँखों में
ख्वाबों को पलते देखा है.

तेरे घर के एक कोने में
थोड़ी सी जगह तो पाई है,
लता पे आई नव कलियों ने
'मधुकर' खुशबू महकाई है.

2 टिप्‍पणियां:

  1. bahut hi sunder nazam hai.sach me psand ayee.जीना मुश्किल हो जाता है.
    कोई अनबन सी होती है.koee anban si jab hoti hai jyada achha hai shayd

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  2. kyaa baat hai madhur dear.....!!!

    blogging mubaarak ho...

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